Sunday, 24 February 2008

कभी कभी

कभी कभी तेरी पलको पे झिल्मिलाऊ मई ,
तू इंतज़ार करे और ना और मैं.
समंदरो मैं जाकर फरेब ना देना ,
तू कहें तो किनारे पर ही डूब जाऊ मैं.........

रौशनी के फूल सजाएँ है हमने तुम्हारी मोह्बात मैं
आपके चेहरे को चाँद समझ के देखा है रात मैं
तन्हाई से हम अपनी ज़िंदगी मैं बहोत लदे हैं
पर अब ज़िंदगी गुज़रना है मुश्किल हो न तू अगर साथ मैं

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