दुःख तू यह हे के अपने ही हाथों
घिर महफूज़ हू गया जीवन
हम ने घाम में इलाज दूंध लिया
वरना सुब ला-इलाज बैठे हैं
इशाक की राह पर्ने वलून को
हिजर बी-चैन कर के मरता हे
अपना अपना नसीब होता हे
हम भरे शहर में अकेले हैं
तुम ने दिल का कहा, तू फिर सुन लू
हम ने बुक्सा तुम्हें कियामत तक
Monday, 24 March 2008
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